एक जैसी ही कोशिकाएँ
एक जैसी ही सरंचना
एक ही रक्त का स्त्राव
एक ही सर्जक सर्वजना
फिर भी पृथक है अंतर
अनुभूतियों का समुन्दर
कहीं सदाशयता अनमोल
कहीं स्वार्थपरता के तोल
कुछ स्वछन्द उच्च विचार
कुछ संकीर्णता के लघु सार
कहीं विनम्रता के फूल
कहीं दर्प के तीक्ष्ण शूल
कहीं सतही ज्ञान का कोलाहल
कहीं मौन अात्मज्ञान अविरल
कहीं आकांक्षाएँ अनगिनत
कहीं सुखद तुष्टि असीमित
मेघधनुष तो बस सतरंग
इंसा के गहरे असंख्य रंग
समाविष्ट करने में हूँ असक्षम
एक जीवन अपर्याप्त अक्षम..
- अनीता गुप्ता
Very true...
ReplyDeletewah!!
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